चलिए शुरू करने से पहले मैं आपको अपना छोटा सा परिचय देना चाहूंगा। मेरा नाम अविनाश शर्मा उम्र 26 साल और फिलहाल में कुछ भी नहीं कर रहा कर भी रहा हूं लेकिन कर भी नहीं रहा। बहुत समय से मैं इस विषय पर सोच रहा था कि ब्लॉगिंग की जाए लेकिन अपनी लापरवाही और समय के महत्व को ना समझने के कारण यह हो नहीं पा रहा था। लेकिन आज ऐसे ही मन में ख्याल आया कि चलो कोशिश तो करते हैं तो आज उसी छोटी सी कोशिश एक हल्के से प्रयास के साथ कुछ नया करने का प्रयत्न किया है। उम्मीद है कि लोग मेरे ब्लोग्स पढ़ेंगे और ना भी पढ़े तो मैं कहां लोगों को पढ़ाने के लिए लिख रहा हूं।
जैसा कि होता है डेली ब्लॉग की शुरुआत सुबह उठने से होती है या फिर कुछ अलग किया हो तो उसे होती। मेरी वैसे तो जिंदगी कुछ साधारण की अभी तक कुछ सालों से लगभग दो-तीन सालों से कुछ ऐसे ही खाली सा है और नॉर्मल जैसी वही सुबह उठना खाना सोना यही हो रहा था और आगे भी शायद पता नहीं कब तक होता रहेगा। कभी-कभी कुछ-कुछ ऐसे दिन आ जाते हैं जब थोड़ा बड़ा कुछ हटके हो जाता है जैसा कि आज का ही दिन मेरा कुछ हटके था बहुत समय के बाद कुछ काम करने के लिए घर से बाहर निकला था। चाहिए उसके बारे में बाद में बात करेंगे पहले अपने ब्लॉग की शुरुआत की जाए आज सुबह तकरीबन 7:00 बजे मेरी आंख खुली जानू जो कि मेरा कुत्ता है।
यह भी रात को उसी रुम में सोता है जिस रूम में मैं सोता हूं तो यह सुबह 7:00 बजे तक मुझे उठाने का काम चालू कर देता है और मुझे भी उतना ही पड़ता है। तो आज भी कुछ इसी तरह से इसमें मुझे सुबह 7:00 बजे के करीब उठा दिया था।
सुबह उठने के बाद तुम्हारा सबसे पहला काम या तो दूध जाना होता है या अखबार लाना होता है तो यह मेरे मोड़ पर निर्भर करता है कि मैं पहले दूध लाऊं या अखबार। तो आज हमने फैसला अखबार लाने का किया तो उठते ही हम दोनों नीचे बाजार की तरफ चले गए और वहां से अखबार लाकर घर में रख दी। उसके बाद हम दोनों दूध लेने चले गए दूध लाने के बाद आज मुझे फिर से पैन कार्ड बनाने के लिए जाना था। तो आज सुबह ही उन भैया ने जो लोक मित्र केंद्र में होते हैं उन्होंने मुझे सुबह 9:00 बजे तक बुला लिया था। क्योंकि पिछले चार-पांच दिनों से साइट के मेंटेनेंस के काम के कारण पैन कार्ड का फॉर्म पूरा नहीं हो पा रहा था। इसलिए आज सुबह ही मुझे बुला लिया था तो फिर मैंने भी जो जोनु को घर में बांधा और स्कूटी लेकर छतरी की तरफ चल दिया। लेकिन आज फिर मेरी किस्मत खराब थी और मेरा काम आज फिर ना हो सक फिर लगभग 1 घंटे बाद 10:00 बजे तक मैं घर को वापस आ गया। जोनू के लिए दुकान से ब्रेड और दही ले आया और घर आकर इसे गिरा दिया बस यही खाना पीना पहले जैसे काम के कोई ब्लॉग में लिखने वाली बात होती नहीं लेकिन चलो आज पहला है तो थोड़ा बड़ा पकाऊ काम भी चल पड़ता है। ऐसे ही टाइम बीता जा रहा था लेकिन जैसा कि मैंने आपको ऊपर बताया कि आज का दिन कुछ अलग था दरअसल पिछले कल मैंने दिव्य हिमाचल समाचार पत्र मैं एक पत्रकार के रूप में कार्य करने का काम शुरू किया था। बहुत समय से घर में खाली बैठने के कारण ऐसा प्रतीत हुआ कुछ करना चाहिए तो इसी सिलसिले मे मामा जी की मदद से दिव्य हिमाचल के एक पत्रकार से बातचीत करके वहां पर कार्य करने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन को काफी समय हो चुका था तो परसो शाम को उनका कॉल आया कि कल हेड ऑफिस आकर काम के लिए बात कर लेना। तो मैं पिछले कल मटौर हेड ऑफिस जाकर बात कर आया था। उन्होंने मुझे मेरे घर से लगभग आठ 9 किलोमीटर आगे कोटला में रिपोर्टिंग का कार्य दिया तो आज उसी काम से कोटला जाने की सोच रहा था। तो 12:00 बजे तैयार होकर मैं कोटला चला गया यह मेरे लिए यहां कांगड़ा में ऐसा पहला मौका था जब मैं यहां कुछ अकेले पहली बार ऐसा काम कर रहा था। हां घबराहट काफी थी और डर भी काफी था कि आगे क्या होगा लेकिन चलो भगवान भोलेनाथ का नाम लेकर आज कोशिश कर ली और मैं जोनू को घर में छोड़कर कोटला चला गया। सारे रास्ते में यही चला रहा था कि मैं वहां करूंगा क्या ना मैं वहां किसी को जानता ना पहचानता केबल एक व्यक्ति को छोड़कर जिसका नाम राहुल है और वह मेरे साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में 2 साल साथ में पढ़ा था। बस इतना ही और मैं कोटला पहुंच गया आते आते तो मैं यह भी सोच रहा था कि चलो वहां जाकर पुलिस चौकी, ग्राम पंचायत के प्रधान वहां पर और संगठनों के व्यक्ति सभी से मिलूंगा लेकिन जितना यह सोचने में आसान लग रहा था उतना ही मेरे लिए चुनौती भरा कार्य भी था। मैं तकरीबन 12:30 बजे के करीब कोटला पहुंच गया वहां पर सबसे पहले मैंने दिव्य हिमाचल समाचार पत्र लेने की सोची और जहां पर अखबार मिलती थी वहां चला गया। वहां पहुंचने के बाद मैंने वहां मौजूद अंकल जी से ऐसे ही बातचीत करना शुरू किया तो मैंने उन्हीं से यह पूछ लिया यहां पर पत्रकार कौन है तो उन्होंने पहले तो मुझसे पूछा कि क्यों तो मैंने उनको बताया जी मैं पहली बार फील्ड में दिव्य हिमाचल की तरफ से काम कर रहा हूं। तब उन्होंने कहा कि एक तो मैं खुद हूं अमर उजाला से और यहां बाहर भी हैं फिर ऐसे ही हम दोनों ने लगभग 15:20 मिनट बातचीत की उन्होंने मुझे बताया की किस तरह से उनको 20 साल इसी पत्रकारिता में जुड़े हुए हो गए हैं उन्होंने मुझे और भी कई विषयों के बारे में समझाया थोड़ी देर उनसे बात करने के बाद मैं राहुल से मिलने के लिए वहां से आ गया और राहुल के पास क्या वहां पर राहुल से थोड़ी देर बात करने के बाद मैं वापिस कोटला बाजार की तरफ आ गया । जब मैं बाजार में आया तुम मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं तो इसलिए फिर से मैं उन्हीं अंकल के पास चला गया जिनके पास पहले बैठा हुआ था उन्होंने बताया कि एक और पत्रकार हैं जिसकी दुकान बाहर रोड के साथ में है। तो मेरा मन हुआ कि चलो उनसे भी मिल लेते हैं तो मैं उनका पता करते हुए उनकी दुकान के पास पहुंचा लेकिन सच बताऊं तो कुछ बंदे के साथ मिल गया कुछ अच्छा नहीं लगा बहुत ही अजीब सा आदमी था फिर भी चलो मुझे बात करना मैंने जारी रखा और उसने मुझे पत्रकारिता के नकारात्मक प्रभाव से मुझे डराने का प्रयास जारी रखा। अभी हम बात कर रहे थे कि तभी वहां एक लड़का आया और उससे कहने लगा की पीछे रास्ते में एक ट्रक सड़क से नीचे उतर गया है लेकिन उसने जगह के बारे में नहीं बताया था तो मैंने उससे पूछ लिया कि कहां तो दुकान के अंदर बैठा हुआ आदमी बोलने लगा नहीं नहीं कुछ भी नहीं हुआ होगा ऐसे ही है। उसकी बातों से ऐसा लग रहा था कि उसको मेरा वहां आना किसी समाचार पत्र के लिए कार्य करना अच्छा नहीं लग रहा था। तो फिर मैंने अंत में उससे विदा ली और मैं वहां से चला गया। मेरे पास दो रास्ते थे या तो मैं घर को चला जाऊं या थोड़ा आगे जाकर देख कर रहा हूं कि वो ट्रक कहां गिरा है जिसकी बात वह लड़का कर रहा था तो मैं स्कूटी लेकर थोड़ा आगे चला गया लेकिन वहां कुछ नहीं था तो मैंने यह निर्णय लिया की आज घर को चलते हैं कल फिर से आऊंगा फिर मैं वापस घर की तरफ आ गया लगभग तीन-चार किलोमीटर आगे आने के बाद हनुमान मंदिर के आगे एक हल्के से मोड़े के पास कुछ लोग खड़े थे और गाड़ियां भी खड़ी थी। मैंने स्कूटी को साइड मिल गया और जहां पर भीड़ खड़ी थी वहां पर आकर देखना चाहा। वहां पहुंचते ही सबसे पहले मेरी नजर रोड के सामने टूटी हुई टहनियों पर पड़ी वहां पर कुछ ऐसा जहां झाड़ियां जी बिल्कुल टूट गया था और थोड़ा आगे चलकर जब नीचे देखा तो वहां एक बड़ा एलपी ट्रक सीधा नीचे पढ़ा हुआ था अभी मैं वहां देख रहा था तभी पीछे से पुलिस में मौके पर पहुंच गई मैं हेलमेट रखने के लिए स्कूटी की तरफ गया और जब वापस आया तो एक पुलिस का जवान वहां साइड से कुछ साड़ियों का सहारा लेते हुए नीचे की तरफ उतर रहा था। जो एक बहुत ही खतरनाक काम था क्योंकि वहां पर पैर रखने की जगह भी नहीं थी और वह पुलिस के जवान वहां से नीचे उतर के उस ट्रक के पास किया जहां पर उस ट्रक का ड्राइवर था और वह उस ट्रक के ड्राइवर को ऊपर ले आया मेरे लिए तो यह खबर थी और मैंने वहां खड़े-खड़े ही लिखना चालू कर दिया था लेकिन मेरे फोन का कैमरा ठीक ना होने के कारण मैंने फोटो नहीं ली। वहां पर मौजूद थाना प्रभारी संजय शर्मा ने उस ड्राइवर से बात कर ली और वहां से जाने ही वाले थे तभी मैंने उनसे बात करने की कोशिश की तब उन्होंने सबसे पहले मेरा परिचय दिया मैंने उनको बताया कि मैं अविनाश शर्मा भाली का रहने वाला हूँ। और आज ही दिव्य हिमाचल की तरफ से रिपोटिंग का काम करने के लिए कोटला आया हूँ। मेरी बात तो सुन कर उन्होंने मेरी पीठ पर हाथ रखा और कहा चलो अच्छी बात है तो उन्होंने मुझे ऐसे ही मज़ाकिया अंदाज में पूछा कि मुझे क्या चाहते हो। मैंने उनको कहा कि इस घटना के बारे में जो भी है सब कुछ। तो उन्होंने बहुत अच्छे से पूरी घटना की जानकारी दे दी।
फिर में सीधा घर आ गया जहाँ मेने उस घटना की खबर बना कर हेड ऑफिस भेज दी। उसके बाद घर मे कॉफी पी मैग्गी खाई जोनु को घुमाया ओर फिर रात के कहने की तैयारी करके खाना बना कर ओर खा कर अभी बिस्तर में बैठ के आज दिन भर के बारे में लिख रहा हूँ। आब रात भी बहुत हो गयी है और नींद भी आ रही है तो चलो सोते है आज के लिए इतना ही काफी है। बाकी कल। 😊
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