अविनाश शर्मा
नमस्कार
आज दूसरा दिन है ब्लॉग लिखने का और आज कुछ खाश है नहीं। वस भी दिन भर का आज रविवार था तो दिन भर घर मे ही था तो पहले सुबह उठते ही घर के जो काम है मेरे वो किये जैसे दूध लाना और अखबार लाना।
लेकिन है आज जब में अखबार लेन गया था तो में थोड़ा घबराया हुआ था क्योंकि मुझे ये देखना था कि आज जो न्यूज़ पेपर आया है दिव्य हिमाचल का उसमे वो खबर लगी होगी या नहीं जो मैने पिछले कल भेजी थी। तो सबसे पहले जा कर मैने वो ही देखी। पहले तो मिली नही फिर आखिर कर कांगड़ा बाले पेज पर वो छपी हुई थी। उसके देखने के बाद दिल तो थोड़ा सकुन मिला और में बापिस घर आ गया। आज रविवार था इसलिए आज मुझे पता था कि कुछ खाश तो होगा नही इसलिये आज में घर मे ही था दिन तक तो कपड़े थे धोने को वो धो लिए खाना खाने के बाद थोड़ी देर धूप सेकने के बाद मेरा मन किया कि चलो कोटला तक जा के देख आते है क्या पता कुछ मिल जाये। फिर में तैयार हुआ और कोटला चला गया वहां तो वो ही था जैसा मैंने सोचा था सनाटा सारा बाजार बंद था तो थोड़ी देर वहाँ बैठे के बाद में बापिस घर आ गया इसी प्रकार शाम हो गयी । और हाँ पिछले कल में एक छोटी से भागवत गीता ले आया था। तो पिछले कल से ही उसको भी शाम को पूजा करने के बाद थोड़ा पड़ लेता हूँ। फिलहाल तो 2 ही दिन हुए है लेकिन जब भी में उसे पड़ता हु बहुत अच्छा सा लगता है आपने अंदर शांति सी महसूस होती है। चलो आज बात भागवत गीता पर ही कि जाए। जितना मैने इसके बारे में सुना है या जितना मुजे इसके बारे में पता है।
बहुत समय से इच्छा थी कि घर मे भागवत गीता लाऊं और उसे पढूं तो पिछले कल एक छोटी से भागवत गीता की पुस्तक ले आया। जब मैं छोटा था तब tv पर रामायण और महाभारत का प्रशारण होता था तो पूरा परिवार मिल कर उसे देखता था। उस समय नादानी ओर नासमझी के चलते जब भी भागवत गीता का समय आता तो उसे बोरिग ओर पकाऊ समझ कर देखते ही नही थे लगभग एक हफ्ते तक भागवत गीता को tv पर दिखाया जाता था और मैं पूरा हफ्ता उसे नही देखते था।
लेकिन जैसे जैसे समय बढ़ता गया उम्र बढ़ती गयी वैसे वैसे भागवत गीता के बारे में पता लगता गया और इसके महत्व का भी थोड़ा थोड़ा पता लगने लगा। लेकिन ज्यादा इस के प्रति समान और इज़त तब मैंने मन मे ज्यादा हुई जब कॉलेज के समय मे आने धर्म के प्रति जागरूकता हुई। कॉलेज के समय ही मुझे ये एहसास होने लग गया था कि एक हिंदू के लिए भागवत गीता क्या है। जब मैं उस समय इस विषय को समझ रहा था तो आपने समाज मे बहुत से ऐसे उदाहरण देखें जो आपने धर्म का ज्ञान न होने के कारण ईसाई मिशनरियों और मुस्लिन जिहाद का शिकार हुए। जहां दूसरे धर्म के लोग अपनी किताबों को बहुत ज्यादा महत्व देते थे ईसाई अपनी बाइबल को और मुस्लिम अपनी कुरान को जबकि बाइबल और कुरान से ज्यादा ज्ञान और किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण और जीवन जीने का ज्ञान भागवत गीता में भरपूर मात्रा में भरा पड़ा है। लेकिन बात कही है ना की जब हम आपने आप को नही जानेगे तो कोई और हमे अपनी तरह बना देगा। इसी बात का फायदा उठा कर मुसलमानों और ईसाइयों ने हिंदुओं का जोरो शोरो से धर्म परिवर्तन करवाया। जो बहुत ही ज्यादा चिंता का विषय था। अभी भागवत गीता के बारे में में ज्यादा नही कहूँगा क्योंकि अभी मैने इसे पढ़ना शुरू ही किया है जिसके लिए में खुद को खुशकिस्मत समझता हूं की मैं भी इसको पढ़कर और इसके अंदर जो ज्ञान है जीवन जीने का मार्गदर्शन है उसको हासिल करने की कोशिश करूंगा। आगे भी इस विषय पर में यहां बात करूंगा। यह विषय इतना बड़ा है कि समझ नही आता कि शुरुआत कैसे करें और अंत कैसे करें लेकिन धीरे धीरे थोड़ा थोड़ा करने इस पर बात होती रहनी चाहिए।
🙏🚩❤️
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